जिन्दगी एक सवाल हैं
हर नजर एक सवाल हैं ,
हर जुबाँ पर एक सवाल हैं ,
आती -जाती जो एक साँस हैं ,
उस साँस पर भी एक सवाल हैं,
जो नजर झुकी तो क्यों झुकी हैं ,
जो नजर उठी तो क्यों उठी हैं ,
झुकती निगाहों का क्या अरमान हैं ,
उठती निगाहों में कैसा फरमान हैं ,
और बंद पलकों के नीचे भी ,
एक ख्वाबों भरा आसमान हैं ,
गर इनमें जिन्दगी को तलाशने निकले तो क्या ?
किसी एक से भी जिंदगी का इक्तफाक होता हैं ,
कभी इसी क्या का जबाब खुद से पूछिएगा ,
क्या ,क्यों ,और कैसे को लेकर मन में फिर से एक सवाल होता हैं ,
जुबाँ बंद रखेगें तो लोग पूछेगें क्यों ?
गर जुबाँ खोल दी तो लोग पूछेगें क्या ?
क्या आप बता सकते हैं ? जुबाँ का तीसरा कार्य ,
नहीं तो सोचिये इस जुबाँ का करेगें क्या ?
हर शब्द एक सवाल हैं ,
हर दिल में एक सवाल हैं ,
जो शब्दों में बयां हुआ ,
वो नजरों के लिए सवाल बना ,
जो निगाहों ने देखा ,
वो मन के लिए सवाल बना ,
जो मन को भाया तो,
वो दिल के लिए सवाल बना ,
और जो दिल ने चाहा ,
वो जिन्दगी के लिए सवाल बना ,
जो जिन्दगी ने कबूल किया ,
वो जिन्दगी की किसी राह पर जाकर सवाल बना ,
जो उस सवाल का जबाब ढूंढने निकला तो ,
वो एक दिन खुद अपने आप के लिए सवाल बना ,
ज्यों ही जिन्दगी ने कदम बढ़ाने शुरू किये ,
तो राहों को लेकर सवाल बना ,
जो राहों का काफिलों से इक्तफाक हुआ ,
तो मंजिलों को लेकर सवाल बना ,
जो मंजिलों पर पहुँच कर सफलता ने कदम चूमें ,
तो एक बार फिर अतीत को लेकर सवाल बना ,
हर नजर एक सवाल हैं ,
हर जुबाँ में एक सवाल हैं ,
इंसान के मन -मष्तिक में सवाल हैं ,
इंसान के दिल और उसकी धड़कनों में सवाल हैं ,
जब हर शख्स अपने आप में एक सवाल हैं ,
तो वो कौन हैं ? जो इन सवालों का जबाब देगा ,
ये भी तो अपने आप में एक सवाल हैं ,
आखिर कब हम इन सवालों के चक्रव्यूह से बाहर आएंगे ?
अपने हर सवाल का एक पुख्ता जबाब पायेंगे ,
और पूछेंगे क्या अब भी कोई सवाल बाकि हैं ?
लो फिर से उठ खड़ा हुआ एक और नया सवाल ,
जब अतीत को लेकर एक सवाल हैं ,
वर्तमान एक सवाल हैं ,भविष्य भी एक सवाल हैं ,
तो अब बस कीजिये और मेरी बात मान लीजिये जनाब ,
कि जिन्दगी अपने आप में एक सवाल हैं।

0 Comments