एक एहसास है अलग-अलग व्यक्तित्व का /
दोस्ती एक उपासना हैं ,
एक नाम है अलग -अलग भावतत्व का।
दोस्ती एक नाम हैं ,
कई धर्मों और मजहबो को जोड़ने का।
दोस्ती एक व्रत है,
कई भावनाओं को एक राह पर मोड़ने का।
इस दोस्ती को अर्पित हैं ,
चंद अल्फाज मेरे।
इस दोस्ती को समर्पित है ,
भावनाऐं और एहसास मेरे।
दोस्ती एक जज़्बा हैं ,
जिसे जी जाने को जी चाहता हैं।
दोस्ती एक मीठी सी चुभन हैं,
जिसे सह जाने को जी चाहता हैं।
दोस्ती एक काँटों भरी राह हैं ,
जिस पर से गुजर जाने को चाहता हैं।
दोस्ती एक फूलों की सेज हैं ,
जिस पर सिमट जाने को जी चाहता हैं।
दोस्ती पर जी चाहे कि ,
हद से गुजर जाए हम।
एक लम्हें को सदियों की तरह जिये ,
और दूसरे ही पल दुनिया से कूच कर जाएं हम।
दोस्त की हंसी पर ,
हजारों खुशियां कुर्बान हैं।
दोस्ती की जमीं पर इंसान ,
दो जिस्म एक जान हैं।
मैं ना रही तो मेरे ये अल्फाज याद आयेगें तुम्हें।
मेरी गैरमौजूदगी में मेरा एहसास दिलाएँगे तुम्हें।
गर कभी बिछड़ गए तो हमें भूला ना देना।
मेरे ये अल्फाज एहसास हैं मेरे ;इन्हें मेरा नाम देना।
अब वक़्त हो चला हैं ;तुम्हें अलविदा कह रही हूँ।
लेकिन जाते -जाते एक अन्तिम सवाल कर रही हूँ।
मेरे ये अल्फाज रो रहे हैं आज ,
शायद तुमसे जुदा होने पर।
क्या तुम्हें एहसास हैं मेरी दोस्ती का ,
वहीँ जो मैंने लुटा दिए तुम्हारी दोस्ती पर।


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